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Showing posts from September, 2018

अपनी कमजोरी में अपना बल छुपा है

बहुत समय पहले की बात है , किसी गाँव में एक किसान रहता था . वह रोज़ भोर में उठकर दूर झरनों से स्वच्छ पानी लेने जाया करता था_. *इस काम के लिए वह अपने साथ दो बड़े घड़े ले जाता था , जिन्हें वो डंडे में बाँध कर अपने कंधे पर दोनों ओर लटका लेता था* _उनमे से एक घड़ा कहीं से फूटा हुआ था ,और दूसरा एक दम सही था . इस वजह से रोज़ घर पहुँचते -पहुचते किसान के पास डेढ़ घड़ा पानी ही बच पाता था .ऐसा दो सालों से चल रहा था_. *सही घड़े को इस बात का घमंड था कि वो पूरा का पूरा पानी घर पहुंचता है और उसके अन्दर कोई कमी नहीं है , वहीँ दूसरी तरफ फूटा घड़ा इस बात से शर्मिंदा रहता था कि वो आधा पानी ही घर तक पंहुचा पाता है और किसान की मेहनत बेकार चली जाती है*. _फूटा घड़ा ये सब सोच कर बहुत परेशान रहने लगा और एक दिन उससे रहा नहीं गया उसने किसान से कहा ,“ मैं खुद पर शर्मिंदा हूँ और आपसे क्षमा मांगना चाहता हूँ ?”_ _“क्यों ? “ किसान ने पूछा , “ तुम किस बात से शर्मिंदा हो ?”__ *“शायद आप नहीं जानते पर मैं एक जगह से फूटा हुआ हूँ , और पिछले दो सालों से मुझे जितना पानी घर पहुँचाना चाहिए था बस उसका आधा ही पहुंचा पाया ह...

आभूषणों का क्या प्रयोजन

हस्तस्य भूषणं दानं सत्यं कण्ठस्य भूषणम् । कर्णस्य भूषणं शास्त्रं भूषणै: किं प्रयोजनम् ॥ हाथ का आभूषण दान करना है, कण्ठ का आभूषण सच्चाई है, कान का आभूषण शास्त्र सुनना है तो (बाह्य)  आभूषणों का क्या प्रयोजन । Published on Famous Motivational Tales To read more visit us .

Value of time

आयुष: क्षणमेकोऽपि, न लभ्य: स्वर्णकोटिकै: ।  स चेन्निरर्थकं नीत:, का नु हानिस्ततोऽधिका: ॥ आयु का एक क्षण भी करोडों स्वर्ण मुद्राएँ देकर भी प्राप्त नहीं किया जा सकता । अत: वही यदि व्यर्थ बिता दिया गया तो उससे अधिक हानि और क्या होगी ॥ Even a moment of age can not be obtained by giving millions of gold coins. Therefore, if the same was spent in vain, then what would be more harm than that? Time  is  precious  because it is limited. [[image:  https://pixabay.com/en/time-timer-clock-watch-hour-371226 /]] Published on Famous Motivational Tales To read more visit us .

शब्दों के दास न बनें

एक बार एक बूढ़े आदमी ने अफवाह फैलाई कि उसके पड़ोस में रहने वाला  नौजवान चोर है l  यह बात दूर - दूर तक फैल गई आस - पास के लोग उस नौजवान से बचने लगे l  नौजवान परेशान हो गया कोई उस पर विश्वास ही नहीं करता था l  तभी गाँव में चोरी की एक वारदात हुई और शक उस नौजवान पर गया उसे गिरफ्तार कर लिया गया l  लेकिन कुछ दिनों के बाद सबूत के अभाव में वह निर्दोष साबित हो गया l  निर्दोष साबित होने के बाद वह नौजवान चुप नहीं बैठा उसने बूढ़े आदमी पर गलत आरोप लगाने के लिए मुकदमा दायर कर दिया पंचायत में बूढ़े आदमी ने अपने बचाव में सरपंच से कहा l  'मैंने जो कुछ कहा था, वह एक टिप्पणी से अधिक कुछ नहीं था किसी को नुकसान पहुंचाना मेरा मकसद नहीं था l  सरपंच ने बूढ़े आदमी से कहा, 'आप एक कागज के टुकड़े पर वो सब बातें लिखें, जो आपने उस नौजवान के बारे में कहीं थीं, और जाते समय उस कागज के टुकड़े - टुकड़े करके घर के रस्ते पर फ़ेंक दें कल फैसला सुनने के लिए आ जाएँ बूढ़े व्यक्ति ने वैसा ही किय.. अगले दिन सरपंच ने बूढ़े आदमी से कहा कि फैसला सुनने से पहले आप बाहर जाएँ और उन कागज के टुकड़ों को, जो आ...

जब जब ये सावन आया है। अँखियाँ छम छम सी बरस गई।

जब जब ये सावन आया है। अँखियाँ छम छम सी बरस गई। तेरी यादों की बदली से। मेरी ऋतुएँ भी थम सी गई । घनघोर घटा सी याद तेरी । जो छाते ही अकुला सी गई । पपिहे सा व्याकुल मन मेरा। और बंजर धरती सी आस मेरी। कोई और ही हैं... जो मदमाते हैं। सावन में 'रस' से, भर जाते हैं । मैं तुमसे कहाँ कभी रीती हूँ । एक पल में सदियाँ जीती हूँ। मन आज भी मेरा तरसा है। बस नयन मेघ ही बरसा है।। मन आज भी मेरा तरसा है। बस नयन मेघ ही बरसा है।। डॉ. मधूलिका मिश्रा त्रिपाठी Published on Famous Motivational Tales To read more visit us .