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चाणक्य नीति या चाणक्य नीतिशास्त्र -

 चाणक्य नीति एक प्राचीन भारतीय नीति ग्रंथ है, जो महान संगठनकार और दार्शनिक चाणक्य द्वारा लिखा गया था। यह ग्रंथ समाज, राजनीति, धर्म, नैतिकता, आचार-व्यवहार और अन्य जीवन के क्षेत्रों में समस्याओं का समाधान ढूँढने के लिए सूत्रों का संग्रह है। इस ग्रंथ में चाणक्य जीवन की अनुभूतियों का उल्लेख करते हुए, जीवन के विभिन्न पहलुओं जैसे आचरण, अचरण, सम्बन्ध, नैतिकता, नीति, धन, संस्कृति और अन्य के बारे में अपने दृष्टिकोण को व्यक्त करते हैं। यह एक अद्भुत ग्रंथ है जो लोगों को सफल जीवन और समृद्धि प्राप्त करने के लिए संदेश देता है। लोककथा - 1 चाणक्य एक जंगल में झोपड़ी बनाकर रहते थे। वहां अनेक लोग उनसे परामर्श और ज्ञान प्राप्त करने के लिए आते थे। जिस जंगल में वह रहते थे, वह पत्थरों और कंटीली झाडि़यों से भरा था। चूंकि उस समय प्राय: नंगे पैर रहने का ही चलन था, इसलिए उनके निवास तक पहुंचने में लोगों को अनेक कष्टों का सामना करना पड़ता था। वहां पहुंचते-पहुंचते लोगों के पांव लहूलुहान हो जाते थे। एक दिन कुछ लोग उस मार्ग से बेहद परेशानियों का सामना कर चाणक्य तक पहुंचे। एक व्यक्ति उनसे निवेदन करते हुए बोला, ‘आप...

अगर कोई समस्या हो ही न, तो फिर समाधान कैसा?

अंगदेश के महामंत्री युतिसेन की मृत्यु हो गई। उस राज्य में सबसे बुद्धिमान व्यक्ति को ही मंत्री बनाने का नियम था। इसके लिए पूरे राज्य में परीक्षाएं हुईं और तीन सबसे ज्यादा बुद्धिमान युवक चुने गए। उन्हें राजधानी बुलाया गया। तीनों युवक मुख्य परीक्षा से एक दिन पहले राजधानी पहुंचे। उन्हें एक कक्ष में ठहराया गया। कक्ष में प्रवेश करते ही एक युवक सीधा अपने बिस्तर तक गया और सो गया। शेष दोनों युवकों ने समझा कि शायद उसने परीक्षा देने का ख्याल छोड़ दिया है। वे दोनों रात भर तैयारी करते रहे। अगली सुबह तीनों एक साथ राजमहल पहुंचे। वहां उन्हें परीक्षा की शर्त बताई गई। असल में, परीक्षा के लिए एक कक्ष बनाया गया था। उस कक्ष में एक ताला लगा था। उस ताले की कोई चाबी नहीं थी। उस पर गणित के कुछ अंक लिखे हुए थे। शर्त यह थी कि जो युवक उन अंकों को हल कर लेगा, वह ताला खोल लेगा। उन तीनों युवकों को उस कक्ष में बंद कर दिया गया, और कहा गया कि जो सबसे पहले दरवाजा खोलकर बाहर आएगा, वही महामंत्री बनेगा। तीनों भीतर गए। जो युवक रात भर सोया रहा था, वह फिर आंखें बंद करके एक कोने में बैठ गया। बाकी दोनों ने अ...

अक्लमंद हंस | बुद्धिमानों की सलाह गंभीरता से लेनी चाहिए।

एक बहुत बडा विशाल पेड था। उस पर बीसीयों हंस रहते थे। उनमें एक बहुत स्याना हंस था,बुद्धिमान और बहुत दूरदर्शी। सब उसका आदर करते ‘ताऊ’ कहकर बुलाते थे। एक दिन उसने एक नन्ही-सी बेल को पेड के तने पर बहुत नीचे लिपटते पाया। ताऊ ने दूसरे हंसों को बुलाकर कहा “देखो,इस बेल को नष्ट कर दो। एक दिन यह बेल हम सबको मौत के मुंह में ले जाएगी।” एक युवा हंस हंसते हुए बोला “ताऊ, यह छोटी-सी बेल हमें कैसे मौत के मुंह में ले जाएगी?” स्याने हंस ने समझाया “आज यह तुम्हें छोटी-सी लग रही हैं। धीरे-धीरे यह पेड के सारे तने को लपेटा मारकर ऊपर तक आएगी। फिर बेल का तना मोटा होने लगेगा और पेड से चिपक जाएगा, तब नीचे से ऊपर तक पेड पर चढने के लिए सीढी बन जाएगी। कोई भी शिकारी सीढी के सहारे चढकर हम तक पहुंच जाएगा और हम मारे जाएंगे।” दूसरे हंस को यकीन न आया “एक छोटी सी बेल कैसे सीढी बनेगी?” तीसरा हंस बोला “ताऊ, तु तो एक छोटी-सी बेल को खींचकर ज्यादा ही लम्बा कर रहा है।” एक हंस बडबडाया “यह ताऊ अपनी अक्ल का रौब डालने के लिए अंट-शंट कहानी बना रहा हैं।” इस प्रकार किसी दूसरे हंस ने ताऊ की बात को गंभीरता से नहीं लिया। इतन...