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चूहे और शेर की दोस्ती

एक बार राजस्थान के रणथंभौर के जंगल में एक शेर गहरी नींद सो गया। उसके पास कुछ चूहे लुका-छिपी खेल रहे थे। एक चूहा शेर के पंजे के नीचे फंस गया। शेर उठा, जोर से हँसा और चूहे को जाने दिया! कुछ दिनों बाद चूहे ने शेर की दहाड़ सुनी। उसने देखा कि शेर बहुत दर्द में पड़ा था क्योंकि वह कई रुपये से बंधा हुआ था। चूहे ने अपने नुकीले दांतों का इस्तेमाल किया और रस्सी को काट दिया। इस तरह वह भाग निकला। दरअसल, जरूरतमंद दोस्त काम में दोस्त होता है।  हर दोस्त की यही तमन्ना होती है कि वह जरूरत के वक्त दोस्त के काम आए। "आप एक सच्चे दोस्त हैं," शेर ने कहा। इसके बाद चूहे और शेर की दोस्ती हो गई। वे बाद में जंगल में खुशी-खुशी रहने लगे। ईसप की दंतकथाओं से Published on Famous Motivational Tales To read more visit us .

चापलूस मंडली | चापलूसों की दोस्ती हमेशा खतरनाक होती हैं।

जंगल में एक शेर रहता था। उसके चार सेवक थे चील, भेडिया, लोमडी और चीता। चील दूर-दूर तक उडकर समाचार लाती। चीता राजा का अंगरक्षक था। सदा उसके पीछे चलता। लोमडी शेर की सैक्रेटरी थी। भेडिया गॄहमंत्री था। उनका असली काम तो शेर की चापलूसी करना था। इस काम में चारों माहिर थे। इसलिए जंगल के दूसरे जानवर उन्हें चापलूस मंडली कहकर पुकारते थे। शेर शिकार करता। जितना खा सकता वह खाकर बाकी अपने सेवकों के लिए छोड जाया करता था। उससे मजे में चारों का पेट भर जाता। एक दिन चील ने आकर चापलूस मंडली को सूचना दी “भाईयो! सडक के किनारे एक ऊंट बैठा हैं।” भेडिया चौंका “ऊंट! किसी काफिले से बिछुड गया होगा।” चीते ने जीभ चटकाई “हम शेर को उसका शिकार करने को राजी कर लें तो कई दिन दावत उडा सकते हैं।” लोमडी ने घोषणा की “यह मेरा काम रहा।” लोमडी शेर राजा के पास गई और अपनी जुबान में मिठास घोलकर बोली “महाराज, दूत ने खबर दी हैं कि एक ऊंट सडक किनारे बैठा हैं। मैंने सुना हैं कि मनुष्य के पाले जानवर का मांस का स्वाद ही कुछ और होता हैं। बिल्कुल राजा-महाराजाओं के काबिल। आप आज्ञा दें तो आपके शिकार का ऐलान कर दूं?” शेर लोमडी...