भूमिका भारतीय संस्कृति में भगवान गणेश को प्रथम पूज्य, विघ्नहर्ता और बुद्धिदाता के रूप में पूजा जाता है। हर शुभ कार्य की शुरुआत गणपति अर्चना से होती है। उनके 32 स्वरूप, लोककथाएँ, वेद-वेदांत में संदर्भ और ऐतिहासिक मंदिर उन्हें सार्वकालिक और सार्वभौमिक देवता बनाते हैं। गणेश जी के 32 स्वरूप : सूची कर्नाटक के नंजनगुड में स्थित श्रीकौटेश्वर मंदिर में भगवान गणेश के 32 स्वरूपों की अनुपम प्रतिमाएँ विराजमान हैं। यह विविधता और विस्तार गणेश पुराण सहित कई ग्रंथों में वर्णित है[1]। यह रहे 32 स्वरूप - बाल गणपति तरुण भक्त वीर शक्ति हेरंब बिंज सिद्धि ऊँच्छिष्ट विघ्न क्षिप्र हेरंब लक्ष्मी महागणपति विजय नृत्य उच्च एकाक्षर वरद त्र्यक्ष क्षिप्र प्रसाद हरिद्रा एकदंत सृष्टि उदंड ऋणमोचन धूम्र त्रिमुख सिंह योग दुर्गा गणपति संकट हरण गणपति हर स्वरूप अपनी निज विशेषता, उपासना विधि और प्रेरक वैदिक सूत्रों का प्रतीक है। गणेश जी से जुड़े ग्रंथ और स्तोत्र गणपति अथर्वशीर्ष (अथर्ववेद): गणेश उपासना का प्राचीन वैदिक स्त्रोत। गणेश पुराण: गणेशजी के जन्म, रूप, तथा शक्तियों को विस्तार से दर्शाता है। मुद्गल पुराण: गणपत्य...